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हमेशा देश-सेवा और जनसेवा की भावनाओं के वशीभूत होकर कार्य किया है। विभिन्न संस्थाओं और सरकारी बोर्डों, समितियों में रहकर भी जनहित के कामों पर ध्यान दिया है। हरकदम पर पाया है कि भ्रष्टाचार इस देश को भीतर ही भीतर खोखला करता जा रहा है। स्वार्थ के सामने राष्ट्रहित गौण होता जा रहा है। इस टसि को लेकर कलम की ताकत की कलात्मक अभिव्यक्ति के रूप में सन 2003 में कलम कला पाक्षिक अखबार का प्रकाशन आरम्भ किया, जो अनवरत चल रहा है। अब ब्लॉगिंग के जरिए देश भर के नेक और ईमानदार लोगों की टीम बनाकर भ्रष्टाचार मिटाना चाहती हूं।

Wednesday, May 11, 2011

993 कार्टन अंग्रेजी शराब की तस्करी पकड़ी- पशु आहार की बिल्टी: हरियाणा से जा रही थी गुजरात: 25 लाख थी कीमत

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। अल्माहा ब्राण्ड के पशु आहार की 15 हजार किग्रा की जेएमडी गुड्स कैरियर की बिल्टी व लौंगल्फ ट्रेडिंग (इंडिया) प्रा.लि. के बिल, जो गणेश ट्रेडिंग कं. नयापुरा महाराष्ट्र के नाम से जारी था के फर्जीवाड़े से एक ट्रक सं. जी जे 1 बी वी 1156 में 993 कार्टन हरियाणा निर्मित अंग्रेजी शराब भरकर उसे सिरसा(हरियरणा)  से अहमदाबाद ले जाया जा रहा था। लम्बा सफर तय कर आते समय लाडनूं से गुजरना उनके लिए भारी पड़ा, पुलिस ने उसे डीडवाना रोड पर बाकलिया व सांवराद के बीच मेगा हाईवे पर धर-दबोचा। ट्रक चालक देसराज पुत्र अणदीलाल रैबार, निवासी मोहनपुरा(बूंदी) व सहचालक जुगराज पुत्र दौलतराम रैबारी निवासी लालपुरा(बूंदी) को गिरफ्तार किया है, जिन्हें रिमाण्ड पर लिया जाकर पूछताछ जारी है। थानाधिकारी दरजाराम मेघवाल के निर्देशानुसार सहायक उपनिरीक्षक सवाईखां के नेतृत्व में श्यामलाल, शिम्भूराम, रामप्रसाद सिपाही व चालक बजरंगलाल विश्रोई ने इस अभियान को सफल बनाया। बरामद की गई शराब में 10 632 केन हार्वर्ड 5000 बीयर, 2256 पव्वे एरिस्टोक्रेट प्रीमियम, 2064 पव्वे डीएसपी ब्लेक, 2400 पव्वे सिल्वर पेज, 567 बोतल एरिस्टोक्रेट ओल्ड रिजर्व व्हिस्की, 2304 पव्वे ब्लेंडर प्राइड, 2304 पव्वे सिल्वर पेज ड्राईजिन, 108 बोतल सिग्रेचर व्हिस्की, 96 बोतल ब्लेंडर प्राइड, 360 बोतल एरिस्टोक्रेट प्रिमीयम व्हिस्की,1440 बोतल रॉयल स्टेज व्हिस्की, 1188 बोतल सिल्वर पेज ड्र्राईजिन के कुल 993 कार्टन इस ट्रक में लदे थे। इस ट्रक की आर.सी संतोषकुमार दुलीचंद जैन, घोडासर अहमदाबाद के नाम से है। थानाधिकारी दरजाराम गहनता से अनुसंधान में जुटे हुए हैं।

जसवंतगढ सरपंच पर पद के दुरूपयोग का आरोप : भूमि घोटालों में सरपंच को बर्खास्त करने की मांग



जसवंतगढ (कलम कला न्यूज)। जसवंतगढ के सरपंच कन्हैयालाल प्रजापत लम्बे समय से अनधिकृत रूप से भूमि घोटालों में लिप्त रहने तथा सरकारी, ग्राम पंचायत की भूमियों, पंचायत समिति की भूमियों वगैरह को किसी न किसी तरह से खुर्द-बुर्द करने की योजनाएं बनाकर उनको क्रियान्वित करने के लिए गिरोहबद्ध होकर कार्य करने के आरोप लगाते हुए  पद का दुरूपयोग करने सम्बंधी अन्य अनेक मामलों में सरपंच द्वारा बिना सर्वे में आए अपने एक निजी व्यक्ति को फर्जी बीपीएल का राशन कार्ड तक बनाकर देने आदि की शिकायत करते हुए जीवण मल गुर्जर ने उनकी निष्पक्ष जांच करवाकर सरपंच कन्हैयालाल प्रजापत के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुए सरपंच पद से बर्खास्त करने की मांग की है। सम्भागीय आयुक्त को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि हाल ही में जसवंतगढ के खसरा नं. 19 की सरकारी गैर मुमकिन नाडी की भूमि, जो जलमग्र क्षेत्र (चारागाह के लिए नहीं) की 3 बीघा 5 बिस्वा कुल भूमि है। जिसे किसी को भी बेचा जाना या आवंटन किया जाना भी संभव नहीं, उस भूमि को खुद सरपंच कन्हैयालाल प्रजापत ने सरासर फर्जी तरीकों का इस्तेमाल करके किसी अन्य व्यक्ति की गलत रूप से दर्शा कर एक अनुबंध पत्र के जरिए एक बीघा भूमि अपने नाम बेचान करवा ली। यह अनुबंध पत्र 100 रूपयों के स्टाम्प पेपर पर जुगल किशोर बिहानी पुत्र स्व. प्रेमसुख बिहानी, जाति माहेश्वरी निवासी जसवंतगढ के साथ मिल कर षड्यंत्र रचकर उसे अपनी खातेदारी भूमि बताते हुए मात्र 50 हजार मे बेचान करने की लिखापढी करके खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की है। इसी तरह से जसवंतगढ, आसोटा, खानपुर आदि गांवों की कई जमीनों पर भी बदनियति से काबिज होने के लिए उक्त सरपंच कोशिशें लगातार कर रहा है। पत्र में आरोप लगाया है कि इसके अलावा सरपंच कन्हैयालाल प्रजापत ने भाई-भतीजावाद से ग्रसित होकर अपने एक निजी व अपनी जाति के व्यक्ति वासुदेव प्रजापत पुत्र रामगोपाल प्रजापत निवासी वार्ड सं. 1, जसवंतगढ को बिना बीपीएल सर्वे में आए, बिना चयन हुए ही फर्जी तरीके अपनाकर एक मेडिकल सुविधा कार्ड सं. 103 बनाकर जारी कर दिया, जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की नि:शुल्क चिकित्सा के लिए प्रयुक्त होता है। इस कार्ड में उसने सन 2009-10 के बीपीएल में चयन सूची क्रमांक 3843869 भी फर्जी  अंकित करके अपनी मोहर व हस्ताक्षर किए हंै। इस सम्बंध में पंचायत समिति, लाडनूं के विकास अधिकारी एवं ग्राम पंचायत के सचिव ग्राम सेवक से सूचना के अधिकार के तहत सूचनाएं मांगी गई, जिससे स्पष्ट हुआ कि इस नाम का कोई व्यक्ति चयन सूची में नहीं है। स्पष्ट है कि उक्त कार्ड सरासर फर्जी तरीके से तैयार किया गया है, जो सरपंच द्वारा अपने पद का खुला दुरूपयोग है। इसके अलावा सरपंच कन्हैयालाल के कार्यकाल में रेलवे लाईनों के पास व राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 65 व मेगा हाईवे पर स्थित जसवंतगढ के खसरा नं. 1 व 2 की कीमती भूमि पर कुछ लोगों का कब्जा करवा दिया, जिसे पंचायत समिति लाडनूं ने अपनी भूमि होने से रूकवाया व हटवाया। बाद में इस बात की पूरी जानकारी होते हुए भी उसी पंचायत समिति की आबादी सुदा भूमि में अनधिकृत रूप से अपनी ग्राम पंचायत का एक प्रस्ताव दिखा कर उसे जोधपुर विद्युत वितरण निगम को जी एस एस बनाने के लिए सुपुर्द कर दी तथा उसके आधार पर निगम ने निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया। इसकी जानकारी मिलने पर विकास अधिकारी, पंचायत समिति, लाडनूं ने कार्य रूकवाया। इस प्रकार निगम को भी कार्य शुरू करवाने में काफी नुकसान उठाना पड़ा। अब वर्तमान में कार्य बंद पड़ा है। उन्होंने अपने पत्र में  पूरे प्रकरण की जांच विस्तार से करवाने तथा सरपंच को तुरन्त निलम्बित करवाकर कानूनी कार्यवाही करवाने की मांग की है।

फिर से हो उत्तर प्रदेश के दो टुकड़े


    बिजनौर, मुजफ्फरनगर और सराहनपुर को एक राजनीतिक दल द्वारा उत्तराखण्ड में मिलाने की मांग की जा रही है। यह मांग सर्वथा अनुचित है। उत्तराखण्ड वासी कभी भी उत्तरप्रदेश वासियों को ग्रहण नहीं करेंगे और एक अलगाववाद की स्थिति हमेशा बनी रहेगी। राजनीतिक दलों को बगैर सोचे-समझे इस प्रकार की मांग नहीं उठानी चाहिए। बिजनौर के एक या दो अधिवक्ता उत्तराखण्ड नैनीताल जाकर उच्च न्यायालय में कार्य कर चुके, उन्होंने जो अनुभव बताए उससे स्प्ष्ट है कि उत्तराखण्ड और उत्तरप्रदेश के निवासियों में एकात्मता नहीं हो सकती। अत: इस प्रकार की मांग करने से और जनता का समय नष्ट करने से, जनता को दिग्भ्रमित करने से कोई लाभ नहीं है। होना यह चाहिए कि  उत्तरप्रदेश को दो भागों में बांटने की बात समस्त राजनीतिक दल मिलकर करें, तो सभी समस्याओं का हल हो सकता है। अधिवक्तागण बहुत समय से पश्चिमी उत्तरप्रदेश में उच्च न्यायालय की खण्डपीठ की स्थापना की मांग कर रहे हैं, जो कभी  भी मूर्त रूप नहीं ले सकती। होना यह चाहिए कि उत्तरप्रदेश को दो भागों में बांट दिया जावे और यदि सब मिलकर जोर लगाएं तो यह असम्भव नहीं है। दो हिस्सों में बटने  से पश्चिमी उत्तरप्रदेश में उच्च न्यायालय की स्थापना भी हो जाएगी और दोनों भागों में विकास भी अधिक होगा। जैसे कि पंजाब के ओर आसाम के बटवारे से सुनिश्चित है। छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने से कोई हानि नहीं है। उत्तर प्रदेश अभी भी इतना बड़ा है कि उसकी देखभाल सम्भव नहीं होती। एक वर्ष में समस्त प्रदेश का कोई भी मंत्री या मुख्यमंत्री दौरा नहीं कर सकते। प्रांतीय शीर्ष अधिकारी  भी पूरा नियन्त्रण नहीं रख पाते। सड़कों की जा स्थिति वर्तमान में उत्तरप्रदेश में है, वह भी ठीक हो सकती है, जिस प्रकार से पंजाब और हरियाणा में है। लम्बित वादों का निस्तारण भी शीघ्रतम हो सकता है।
       अत: इधर-उधर की बातें न करके केवल मात्र उत्तरप्रदेश को दो भागों में बांटने की मांग की जानी चाहिए और अपना-अपना स्वत्व भूलकर और निजत्व को त्याग कर ये जनहित में मांग करनी चाहिए। जब समवेत स्वर  से मांग उठेगी तो वह अवश्य ही पूरी होगी।
      पश्चिमी उत्तरप्रदेश में उच्च न्यायालय की खण्डपीठ की मांग यदा-कदा उठती रहती है और टांय-टांय फिस्स हो जाती है। केवल कुछ लोग संघर्ष समिति  के अध्यक्ष और सचिव बनकर अपनी पहुंच सत्ता तक बना लेते हैं और अपना काम निकाल कर फिर ठण्डे पड़ जाते हैं। आज तक हम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों को खण्डपीठ में शामिल नहीं करा सके। कैसी विडम्बना है कि बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सराहनपुर के जिले उच्च न्यायालय की इलाहाबाद पीठ के अधीन है, जबकि जाना लखनऊ होकर पड़ता है। इन जिलों को लखनऊ खण्डपीठ से जोड़ दिया जावे तो  जनता को भी सुविधा रहे और कार्य भी शीघ्र निस्तारित हो। इसके विपरीत इलाहाबाद के पास के जिले लखनऊ बैंच में सम्मिलित है, जबकि उन्हें इलाहाबाद बैंच में सम्मिलित किया जाना चाहिए। यदि अधिवक्तागण इतना ही परिवर्तन करा लेते तो भी उनकी आंशिक सफलता होती।-HITESH KUMAR SHARMA, ADVOCATE, BIJNOUR

Wednesday, May 4, 2011

पुस्तक समीक्षा : हिंदी ब्लॉगिंग - अभिव्यक्ति की नई क्रांति





हिंदी ब्लॉगिंग का विस्तृत दस्तावेज़...  - डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल

कोई पौने चार सौ पृष्ठों की इस किताब में हिंदी ब्लॉगिंग के तमाम छुए.अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला गया . किताब वस्तुतः हिंदी ब्लॉगिंग के विविध आयामों में जमे और डटे ब्लॉगरों की लिखी सामग्री को लेकर संपादित व संयोजित किया गया हैण्  एक तरह से यह ब्लॉगए खासकर हिंदी ब्लॉग के लिए रेफरेंस बुक की तरह हैए जहाँ आपको हिंदी ब्लॉगिंग के तकनीकी पहलुओं से लेकर इसकी सर्जनात्मकता और आर्थिकता आदि तमाम दीगर पहलुओं पर विस्तृत आलेख मिलेंगे.

विविध विषयों पर विद्वान लेखकों का अपनी अपनी शैली में लेखन किताब को न सिर्फ पठनीय बनाता है, बल्कि रोचक और जानकारी परक भी  हैं. अलबत्ता कहीं कहीं कथ्य और विषय में दोहराव हैए मगर यह इसलिए भी जरूरी है कि किसी पाठ्य पुस्तक में कोई चैप्टर ठीक से समझ नहीं आता तो विद्यार्थी किसी अन्य लेखक की किताब का संदर्भ भी अपने फंडे क्लीयर करने में लेता हैण् तो यही बात यहाँ भी लागू हैण् ब्लॉगिंग के कुछ मूलभूत बातों को हर किसी ने अपने अपने एंगल और अपनी लच्छेदार शैली में बताने की भरपूर कोशिश की हैण् बहुत सा मसाला यूं तो नेट पर भी मिल सकता हैए जिसे संबंधित लेखकों ने अलग अलग समय पर अपने ब्लॉगों या अन्यत्र कॉलमों में भी लिखा है. फिर भी, संपादन व संयोजन काबिले तारीफ है और इसके लिए संपादक द्वय अविनाश वाचस्पति और रवींद्र प्रभात बधाई व साधुवाद के पात्र हैं.

तोए यदि आप हिंदी ब्लॉगिंग में हैं, तो इस किताब को बाईए बोरो ऑर स्टील के तर्ज पर कहीं से भी हासिल कर पढ़ना ही चाहिए, और न सिर्फ पढ़ना चाहिए, एक अदद किताब रेफरेंस मटेरियल के तौर पर रखना चाहिए, न जाने कब किस संदर्भ सामग्री की जरूरत पड़ जाए!



हाथ कंगन को आरसी क्या? ये रही किताब की  अनुक्रमणिका -



तकनीकी खंड
यूनिकोड हिंदी टाइपिंग से परिचय - ई पंडित श्रीश शर्मा ।

आओ ब्लॉग बनाएँ - शाहनवाज सिद्दिकी

सजना है मुझे रीडर के लिए - चंडीदत्त शुक्ल

ब्लॉग की बेलाग दुनिया - चिराग जैन

हिंदी ब्लॉगिंग के तकनीकी पहलू - शैलेश भारतवासी

यूनिकोड तक पहुँचने के काँटो भरे रास्ते - रवि.रतलामी

मोबाइल फ़ोनध्टैबलेट कंप्यूटर में हिंदी समर्थन - ई पंडित श्रीश शर्मा

जी.मेल में महत्त्वपूर्ण र्ईमेलों को कंप्यूटर पर कैसे सेव करें - कुन्नु सिंह

आप अपने ब्लॉग का अपना एसएमएस चैनल बनाएँ - विनयप्रजापति

वायस ब्लॉगिंग रू बेकरार आवाज में असर के लिए - पीयूष पांडे

आपका लाइव होना जिंदादिली का नाम है - गिरीश बिल्लौरे मुकुल

ई.मेल में पोस्ट खुद आती है - बी एस पाबला

कैसे बढ़ाएँ ब्लॉग ट्रैफिक? - रतनसिंह शेखावत



ब्लॉग प्रसंग
हिंदी ब्लॉग रू सृजन संकट और कुछ उम्मीदें - सिद्धेश्वरसिंह

आदमी को आदमी से जोड़ रही है हिंदी ब्लॉगिंग - सुरेश यादव

प्रकाशन की समस्या का अंत है हिंदी ब्लॉगिंग - पवनचंदन

हिंदी ब्लॉगिंग रू रचनात्मक अभिव्यक्ति के विविध आयाम - केवलराम

संचार खंड
विश्व से जोड़ता ब्लॉगिंग माध्यम- शिवम मिश्र

ब्लॉगिंग की ताकत - खुशदीप सहगल

हिंदी ब्लॉगिंग से गले मिलें - सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी

जानिए, अपने प्रारंभिक ब्लॉगरों को - रवींद्र प्रभात

हिंदी ब्लॉगिंग : पालने में ही दहाड़ता पूत -अजय कुमार झा

हिंदी ब्लॉगिंग को सही और सकारात्मक दिशा की दरकार - मनोज पांडेय



विमर्श खंड
हिंदी भाषा और साहित्य में चिट्ठाकारिता की भूमिका - रवींद्र प्रभात

ब्लॉगिंग का सामाजिक और साहित्यिक पक्ष - पूर्णिमा वर्मन

मानवीय सर्जना का नवोन्मेष है हिंदी ब्लॉगिंग - गिरीशपंकज

हिंदी ब्लॉगिंग को परिवर्तन के एक ताकतवर हथियार के रूप में ढालने की जरूरत है - प्रमोद तांबट

पारस्परिक संवाद का सशक्त माध्यम है हिंदी ब्लॉगिंग - अविनाश वाचस्पति

वैकल्पिक मीडिया का नया अवतार - अजित राय

हिंदी ब्लॉगिंग का आर्थिक पक्ष - प्रतीक पांडे

यूनिकोड एक ऐसी कोडिंग प्रणाली जिसमें विश्व की सभी जीवंत भाषाएँ समाहित हैं -विजय के मल्होत्रा

ब्लॉग पर हिंदी साहित्य - अखिलेश शुक्ल

हिंदी ब्लॉगिंग में विज्ञान लेखन की संभावनाएँ - शास्त्री जे सी फिलिप

न्यू मीडिया रू सभावनाएँ और चुनौतियाँ - कनिष्क कश्यप

हिंदी ब्लॉगिंग में विज्ञान लेखन - डॉ. अरविंद मिश्र

अंतरजाल पर कविता की दुनिया रू कविता का बाजार दृ अरविंद श्रीवास्तव

हिंदी ब्लॉगिंग में काव्य सृजन की संभावनाएँ - रश्मि प्रभा

चिट्ठाकारिता और उसके कारक तत्व - पद्मसिंह

ब्लॉगिंग और कार्टून विधा - काजल कुमार

समाज निर्माण में ब्लॉगिंग और उसकी रचनात्मकता का योगदान - जयकुमार झा

ब्लॉगिंग रू अभिव्यक्ति का एक सरल सहज और सशक्त माध्यम - वाणीशर्मा

बाजारवाद के इस दौर में हिंदी ब्लॉगिंग की भूमिका - एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन

एक ऐसा माध्यम जिसकी न कोई सीमाएँ हैं न कोई बंधन - शिखा वार्ष्णेय

हिंदी ब्लॉगिंग में अर्थ जगत की गतिविधियाँ - विवेक रस्तोगी

लेखन का अनुभव और सार्थक ब्लॉगिंग - आशीष कुमार अंशु

हिंदी ब्लॉगिंग का सामाजिक व सृजनात्मक पक्ष डॉ. रूपचंद्र शास्त्री मयंक

हिंदी ब्लॉगिंग में आधी दुनिया का यथार्थ - रेखा श्रीवास्तव

ब्लॉग की धार तीखी और मार गहरी होती है - ललित शर्मा

सामाजिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में हिंदी ब्लॉगिंग - वंदना गुप्ता

वास्तविक या आभासी - फौजिया रियाज

नागरिक पत्रकारिता का मजबूत स्तंभ बन सकता है ब्लॉग - उमाशंकर मिश्र

हिंदी ब्लॉग की चुनौतियाँ - उमेश चतुर्वेदी

सामाजिक सरोकार समझें ब्लॉगर - डॉ. सुभाष राय



विश्लेषण खंड
हिंदी ब्लॉगिंग में महिलाओं की स्थिति - रवींद्र प्रभात

ब्लॉगिंग रू आनलाइन विश्व की आजाद अभिव्यक्ति - बालेंदु शर्मा दाधीच

हिंदी ब्लॉगिंग का तेजी से बढ़ता सृजनात्मक दायरा - आकांक्षा यादव

नेट से आगे पहचान और भी है - चंडीदत्त शुक्ल

परिचर्चाखंड
ब्लॉग पर साहित्य की सार्थकता - रवींद्र प्रभात

ब्लॉग, जो पूरे फिल्मी हैं -चंडीदत्त शुक्ल

संस्मरण खंड ब्लॉगिंग में तीन साल - ज्ञानदत्त पांडेय

ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति का अद्भुत माध्यम - अनूप शुक्ल

हिंदी ब्लॉगर और प्रिंट मीडिया - जाकिर अली रजनीश

ब्लॉगर की दिनचर्या पत्नी की जुबानी - रचना त्रिपाठी

साक्षात्कार खंड
हिंदी ब्लॉगिंग छोटा सा समाज है - समीर लाल समीर

हिंदी ब्लॉगिंग को अभी परवरिश की दरकार है - दिविक रमेश

हिंदी के नए सूर और तुलसी ब्लॉगिंग के जरिए ही पैदा होंगे - रवि.रतलामी

आज इंटरनेट सामान्य जीवन का अंग बन चुका है - जी. ण्के. अवधिया

ब्लॉगिंग का व्यसन की तरह प्रयोग नहीं करना चाहिए-  प्रेमजनमेजय

साहित्य अकादमी की तरह ब्लॉगिंग अकादमी भी बने - अलबेला खत्री

ब्लॉगरों को सामूहिक ब्लॉग से जुड़कर अनुभव लेना चाहिए - अविनाश वाचस्पति

आज हिंदी ब्लॉगिंग समानांतर मीडिया का रूप ले चुका है - अमरजीत कौर

वर्चुअल टेक्नोलाजी में जबरदस्त सामर्थ्य है - गौहर रजा

ब्लॉगिंग आत्म प्रचार की नई तकनीक है - कृष्ण बिहारी मिश्र

वर्चुअल दुनिया का प्रभाव मानव मस्तिष्क पर स्थायी होता है - अंबरीश अंबर

हिंदी ब्लॉगिंग ने परस्पर संवाद व विचार विमर्श के नए रास्ते खोले हैं - शकील सिद्दीकी

ब्लॉग, ब्लॉगर और ब्लॉगिंग : एक प्रश्नोत्तरी - सुषमा सिंह

...

पुस्तक के  विषय, अध्याय व लेखक ही किताब की परिपूर्णता की कहानी बयाँ कर देते हैं.

अन्य विवरण .

हिंदी ब्लॉगिंग - अभिव्यक्ति की नई क्रांति

आईएसबीएन नं .  ISBN 978-93-80916-05-7

संपादक - अविनाश वाचस्पति एवं रवीन्द्र प्रभात

प्रकाशक - हिंदी साहित्य निकेतन

16 साहित्य विहार, बिजनौर उप्र . फोन 01342 . 263232

ईमेल .GIRIRAJ@HINDISAHITYANIKETAN.COM

पृष्ठ . 375, मूल्य 495.00 रुपए

Tuesday, May 3, 2011

कैसे खुला नर कंकालों का राज By shri R.P.SINGH,Inspector General Of Polish, JAIPUR


         दिनांक 24 नवम्बर, 1995 को प्रात: छ: बजे मेरे आवास के टेलीफोन की घंटी बजी। टेलीफोन उठाते ही दूसरी ओर से आवाज आई, सर! मैं प्रह्लाद सिंह, उप निरीक्षक, थाना कोतवाली (झुंझुनूं) से अर्ज कर रहा हूं। बगड़  की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर बीड़ (घना जंगल) के पास एक मारूति कार पूर्णतया जली अवस्था में पड़ी है तथा उसमें दो नर कंकाल भी जली अवस्था में हैं। ऐसा लगता है कि घटना रात के करीब बारह-एक बजे की होगी। मैं दो सिपाही मौके पर छोड़कर आपको सूचना देने आया हूं।
      आप पुन: घटनास्थल पर पहुंचो। मैं अभी रवाना हो रहा हूं। मौका डिस्टर्ब नहीं होना चाहिए।  कुछ नहीं बचा। अब तो यह भी पता नहीं चलेगा कि गाड़ी किसकी थी? नम्बर  यह निर्देश देकर मैं रवाना हुआ तथा आधा घंटे में घटनास्थल पर पहुंच गया। वहां दृश्य बड़ा भयावह था। एक मारूति कार बबूल के पेड़ से टकराकर सम्पूर्ण रूप से जली अवस्था में पड़ी थी। उसमें दो नर कंकान पूर्णतया जली अवस्था में फंसे पड़े थे। एक नर कंकाल  आगे स्टेयरिंग के पास था जो गाड़ी के सामने की टक्कर से पिचकने के बाद स्टेयरिंग व सीट के बीच में फंसा हुआ था। दूसरा नर कंकाल पिछली सीट पर था जिसका दाहिना हाथ मुड़कर दरवाजे पर था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि गाड़ी में आग लगने के बाद उसने दरवाजा खोलने का असफल प्रयास किया होगा। गाड़ी पूर्णतया जलकर ठंडी हो चुकी थी। केवल टायरों के निचली ओर से थोड़ा धुंआ  उठ  रहाथा। घटना लगभग ग्यारह-बारह बजे रात्रि के बीच की रही होगी । गाड़ी के नम्बर, रंग, सीट का रंग इत्यादि कुछ भी पहचानने योग्य नहीं थे।
        घटना देखने के बाद मन सिहर उठा। दो जिन्दा व्यक्ति किस प्रकार बचाव के लिए पुकार पुकार कर जले होंगे, सोचकर रोंगटे खड़े हो गए। घटना के छ: घंटे बाद तक किसी भी व्यक्ति ने न तो पुलिस को खबर दी थी और न ही उन्हें बचाने की कोशिश की थी। बड़ी व्यस्त सड़क होने के कारण अनेक वाहन वहां से गुजरे होंगे। जो जले हैं, उनकी चीखें भी सुनी होंगी लेकिन किसी ने उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की। मैं सोच रहा था कि क्या मानवता मर गई है? क्या वास्तव में कलयुग आ गया है? जहां किसी को अपने स्वार्थपूर्ति के सिवाय कोई काम नहीं है। लगता है वे दिन बीत गए जब पड़ोसी के दर्द में उसका पड़ोसी पूरी तरह सिरहाने बैठ उसके दुख-दर्द में शामिल हुआ करता था। क्या होगा इस स्वार्थी दुनिया का?
      सर कुछ नहीं बचा। अब तो यह भी पता नहीं चलेगा कि  गाड़ी किसकी थी? क्या नम्बर था और कौन थे ये लोग? यह बात थानाधिकारी श्री सज्जनसिंह, उपनिरीक्षक ने कही जो मुझसे पहले घटनास्थल पर पहुंच चुके थे। मैंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। बबूल के पेड़ की छाल उतरी हुई थी। सड़क से उस पेड़ की ओर गाड़ी के आने के टायरों के निशान मौजूद थे। गाड़ी की फ्रंट स्क्रीन के टूटे हुए टुकड़े बबूल के पेड़ के पास बिखरे पड़े थे। वहीं पर गाड़ी की लाईट का एक टुकड़ा भी पड़ा था। घटनाक्रम दुर्घटना का ही था। अत: किसी द्वारा गाड़ी में आग लगाने का मामला न मानकर सीधा दुर्घटना मानकर तफतीश आगे बढाई गई। मैंने सभी पुलिसकर्मियों को घटनास्थल के आठ-दस मीटर की दूरी तक चारों ओर बारीकी से तलाश करने के आदेश दिए। अनुमान था कि अक्कर के बाद काँच या अन्य चीजें छिटक कर दूर जाकर जरूर गिरी होंगी। सभी ने बारीकी से तलाशी की। तलाशी रंग लाई। एक सिपाही ने प्लास्टिक का एक छोटा टुकड़ा हाथ में लेकर मुझे दिखाया जो संभवतया कार के मडगार्ड का टुकड़ा था। वह ग्रे कलर का था। इससे अंदाज लगाया गया कि  कार का रंग भी ग्रे ही रहा होगा।
        मैं भी घटनास्थल का बारीकी  से निरीक्षण कर रहा था। अचानक मुझे स्टीकर में लिपटा काँच का टुकड़ा मिला, जिसे उठाकर देखा गया तो उस पर अंगेजी में टांबी एंड कम्पनी लिखा था। पुन: तलाश पर एक अन्य टुकड़ा मिला जिस पर दिनांक 19.8.95 लिखी थी। मुझे लगा कि यदि इस प्रकार के और टुकड़े मिल जाएं तो उन्हें जाड़कर तफतीश में कुछ आगे बढा जा सकता है। अचानक बबूल के पेड़ के पास घास में पड़े एक ऐसे ही टुकड़े पर मेरी नजर पड़ी। मैंने उसे उठाकर देखा ता उस पर एच.पी.डीलर्स एवं दूरभाष नं. 322492 लिखा था। इसी बीच श्री सज्जनसिंह थानाधिकारी, सदर (झुंझुनूं) को भी एक छोटा सा टुकडंा मिला जिस पर सर्विस्ड बाई जी.जी. लिखा था।  हमें मौके पर इस प्रकार के पाँच टुकड़े  मिले। सभी को जोड़कर देखा गया एवं पढा गया। यह अंग्रेजी में लिखा एक पूरी स्टीकर बन गया था। यह संभवत: कार के फ्रंट स्क्रीन पर चिपका हुआ होगा। स्टीकर के टुकड़े टक्कर लगने से टूटकर काफी दूर में फैल गए थे। सभी टुकड़ों को जोड़कर पढा गया तो उस पर सर्विस्ड बाई जी.जी.टांबी एंड कम्पनी, एच.पी.डीलर्स, झोटवाड़ा रोड, जयपुर 6, दूरभाष 322492 सर्विस दिनांक 19.8.95 लिखा था।
      मुख्यालय झुंझुनूं आकर जयपुर के दूरभाष 322492 पर अपना परिचय देते हुए बात की और पूछा गया कि  दिनांक 19.8.95 को जिस ग्रे रंग की मारूति की सर्विस आप द्वारा की गई है, उसका नम्बर क्या है? उसका मालिक कौन है? दिनांक 23.11.95 को गाड़ी किसके पास थी? पता कर तुरन्त बताएं। करीब पन्द्रह मिनट बाद पुन: बात की गई तो बताया गया कि  यह गाड़ी मारूति नं. आर.जे. 14- 3610 है तथा सत्यनारायण जांगिड़, विश्वकर्मा जयपुर के नाम से रजिस्टर्ड हैं। जिनके टेलिफोन नं. 330133 व 330529 हैं।

    .
    उक्त टेलिफोन पर बात की गई तो बताया गया कि यह कार सत्यनारायण जांगिड़ की ही है। दिनांक 23.11.95 को उनके लड़के अनिल तथा दामाद सुभाष जांगिड़ उक्त कार को झुंझुनूं लेकर गए थे तथा अभी तक वापस नहीं आए हैें। सुभाष झुंझुनूं का रहने वाला है और कल उसके लड़के का जलवा (कुआ पूजन) था, उसमें शामिल होने के लिए दोनों साला-बहनोई  साथ ही गए थे। उन्हें जब दुर्घटना के बारे में बताया गया तो सत्यनारायण जांगिड़ तुरंत मौके पर रवाना हो गए।
    कार किसकी थी, कार में कौन-कौन थे, इस बात का पता उस स्टीकर के टुकड़ों से चल गया था। मगर कार में जो नर कंकाल ड्राईविंग सीट पर फंसा पड़ा था, वह किसका था और जो कंकाल कार की पिछली सीट पर था वह किसका था, इस बात का पता लगाना बड़ा कठिन था। दोनों नर कंकाल जलकर राख व टुकड़ों में बदल चुके थे। चेहरे की हड्डियां जले हुए मानव होने का आभास मात्र करा रही थी। इनमें से कौन किस माँ का लाल है ओर कौन किस माँग का सिन्दूर? पता लगाना बड़ा कठिन हो रहा था। दोनों लाशें इस कदर जल चुकी थी कि उन्हें पोस्टमार्टम हेतु मुख्यालय झुंझुनूं ले जाना भी सम्भव नहीं था। अत: मैंने थानाधिकारी श्री सज्जनसिंह को निर्देश दिए कि वह मेडिकल ज्यूरिस्ट को मौके पर ही बुलाकर पोस्टमार्टम करवा देवे।
     घटनास्थल पर जांच-पड़ताल चल ही रही थी कि एक आदमी घबराया हुआ आया। उसने अपना नाम नवरत्न पुत्र मोहनलाल जांगिड़, निवासी सूरजगढ होना बताया। उसने कहा कि वह चिड़ावा में खेतड़ी रोड पर मोटर बाइंडिंग का काम करता है। उसको आज सुबह चिड़ावा के झंडीप्रसाद परमेश्वरलाल  पैट्रोल पम्प के सेलसमेन ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि रात को उसका साला सुभाष मारूति कार नं. आर.जे. 14- 3610 को लेकर करीब बारह बजे पेट्रोल पम्प पर आया था ओर उन्नीस लीटर पैट्रोल लेकर गया था। कार को सुभाष चला रहा था और एक आदमी पीछे की सीट पर सो रहा था। सुभाष ने बताया कि कार की वायरिंग स्पार्क कर रही थी। उसने यह भी बताया कि आज झुंझुनूं रबीड़ में एक मारूति कार जली हुई सड़क पर पड़ी है, संभव है वह वही कार हो। उसके साले सुभाष के घर 27-10-95 को लड़का हुआ था। कल दिनांक 23.11.95 को लड़के का कुआ पूजन था। उसकी पत्नी भी उसमें भाग लेने गई थी। उसने अपने ससुर से फोन पर बात की तो बताया कि सुभाष व अनिल दोनों कार से चिड़ावा  किसी काम से गए थे। अभी तक वापस नहीं आए हैं। कल शाम को चिड़ावा से टेलिफोन से झुंझुनूं बात की थी। उन्होनें कहा था कि वे आठ-नौ बजे तक आ जाएंगे। उसने चिड़ावा में पता किया तो दोनों का रात को देर से चिड़ावा से झुंझुनूं के लिए रवाना होना बताया गया। अत: वह देखने आया है। ओमप्रकाश शर्मा, सेल्समेन ने भी नवरत्न की बात की पुष्टि की।
      सुभाष झुंझुनूं का रहने वाला है, इस बात का पता चलते ही प्रभात टाकीज के पास स्थित मकान पर पहुंचकर उसके पिता श्री लक्ष्मीनारायण, सुभाष की पत्नी श्रीमती सरोज, अनिल की पत्नी श्रीमती कृष्णा से तफतीश की गई। सम्पूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार सामने आया-
      दिनांक 23.11.95 को दिन में झुंझुनूं में सुभाष के लड़के का जलवा (कुआं पूजन) था। इसमें शामिल होने के लिए सुभाष स्वयं तथा उसका साला अनिल, सपरिवार अनिल के पिता श्री सत्यनारायण की मारूति कार नं. आर.जे. 14-3610 से झुंझुनूं आए थे। दिन में सभी ने साथ खाना खाया था। करीब दो बजे सुभाष तथा अनिल दोनों चिड़ावा इझडस्ट्रीयल एरिया में अपनी बेची हुई  ग्रेनाइट कटर मशीनों को देखने गए थे। अनिल के पिता  श्री सत्यनारायण जांगिड़ जो मूल रूप से  बिसाऊ के रहने वाले हैं तथा जयपुर विश्वकर्मा इण्डस्ट्रियल एरिया रोड नं. 9 ए पर राजस्थान प्रोसेस ज्योति, मेटल इंजिनीयर्स एवं जनरल इंजिनीयरिंग कार्पोेशन के नाम से ग्रेनाइट पत्थर की कटाई तथा पिसाई की  मशीन बनाते हैं। सुभाष ने ज्योति मेटल इंजिनीयरिंग वर्कशॉप के नाम से  फैक्ट्री खोल रखी है। चिड़ावा पहुंचकर दोनों ने जोशी स्टोन एंड आयरन स्टोन फैक्ट्री , स्टेशन रोड, चिड़ावा रपर अपनी मशीनें चैक की तथा नई मशीनों की फाउंडेशन चैक की। उसके बाद चिड़ावा की दूसरी फैक्ट्रियों को चैक करने के बाद रात्रि पाल होटल, सिंघाना में अपने मित्रों के साथ खाना खाकर चिड़ावा आ गए। चिड़ावा में अपनग मित्रों को छोड़कर पैट्रोल पम्प से पैट्रोल लेकर झुंझुनूं के लिए रात्रि करीब सवा बारह बजे रवाना हो गए। सुभाष गाड़ी चला रहा था तथा अनिल पिछली सीट पर सो रहा था। गाड़ी की वायरिंग स्पार्क कर रही थी, इस कारण मित्रों ने रात्रि चिड़ावा में ही रूकने के लिए कहा था, लेकिन दोनों नहीं रूके और झुंझुनूं रवाना हो गए थे। झुंझुनूं बीड़ में पहुंचने पर गाड़ी की वायरिंग के पुन:  स्पार्क करने पर चालक सुभाष का ध्यान जैसे ही सामने सड़क पर से हटा होगा, गाड़ी करीब आठ-दस मीटर सड़क के दाहिनी ओर खड़े बबूल के पेड़ से टकरा गई होगी। भयंकर टक्कर के कारण पहले से ही स्पार्क कर रही वायरिंग के कारण पैट्रोल ने आग पकड़ ली होगी और गाड़ी चला रहा सुभाष जांगिड़ तथा कार की पिछली सीट पर  सो रहा अनिल दोनों जिन्दा जलकर मर गए होंगे। दोनों लाशों का मौके पर पोस्टमार्टम करवाया जाकर उनके वारिशान को सुपुर्द कर दी गई।
      घटनास्थल के बारीकी से निरीक्षण के बाद छोटे से सुराग से इतना महत्वपूर्ण मुद्दा हल हो सका। जले हुए नर कंकाल, जिनकी शिनाख्त नहीं की थी, फिर भी कौन सा नर कंकाल किसका है, यह पता चल गया तथा उनके वारिशों को सम्भलवा दिया गया। मात्र दो घंटे में सम्पूर्ण घटना का खुलासा हुआ।

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