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हमेशा देश-सेवा और जनसेवा की भावनाओं के वशीभूत होकर कार्य किया है। विभिन्न संस्थाओं और सरकारी बोर्डों, समितियों में रहकर भी जनहित के कामों पर ध्यान दिया है। हरकदम पर पाया है कि भ्रष्टाचार इस देश को भीतर ही भीतर खोखला करता जा रहा है। स्वार्थ के सामने राष्ट्रहित गौण होता जा रहा है। इस टसि को लेकर कलम की ताकत की कलात्मक अभिव्यक्ति के रूप में सन 2003 में कलम कला पाक्षिक अखबार का प्रकाशन आरम्भ किया, जो अनवरत चल रहा है। अब ब्लॉगिंग के जरिए देश भर के नेक और ईमानदार लोगों की टीम बनाकर भ्रष्टाचार मिटाना चाहती हूं।

Monday, June 13, 2011

सैंकड़ों बीघा जमीन खुर्दबुर्द-----नगरपालिका की सवा सौ बीघा भूमि पर अवैध निर्माण: रूपान्तरण, नियमन व निर्माण इजाजत के करोड़ों हड़पे: प्रशासन लिप्त लीपापोती में? जैन विश्व भारती पर उठे सवाल


  लाडनूं (खुफिया कलम)। लाडनूं शहर बुरी तरह भू माफियाओं के चंगुल में फंस चुका है। कीमती जमीनों को हथियाने के लिए तरह-तरह की चालों को अख्तियार करना और गिरोहबद्ध होकर अपनी कार्रगुजारियों को अंजाम देना, ये भू माफिया भलीभंति जानते हैं। मजे की बात तो यह है कि क्षेत्र का समूचा प्रशासन भी इनके कारनामों में कहीं न कहीं भागीदार अवश्य हैं। तालाबों, पायतनों, चारागाहों और सरकारी गैरमुमकिन अगोर की भूमियों पर अंधाधुंध कब्जे हो रहे हैं, मगर कोई भी बोलने और सुनने वाला नहीं है। और तो और जब यह जानकारी सामने आई कि सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह आदि बातों का ढोल पीटने वाले भी इन गलत कुकर्मों से वंचित नहीं है, तो लोगों को घोर आश्चर्य होना स्वाभाविक है।
     राहुल जैन नामक एक किसी नागरिक ने इस सम्बंध में आवाज उठाई, जिससे राज्यपाल से लेकर जिला प्रशासन तक सक्रिय हुए और कार्रवाई शुरू हुई, परन्तु यह अति दु:खद पहलु है कि स्थानीय प्रशासन पूरी तरह इस मामले में लीपापोती करने में जुटा है।
     महेश सांखला नामक एक समाजसेवी व्यक्ति ने जब मुखर होकर इस सम्बंध में सूचना के अधिकार का सहारा लिया तो उसे पूरी तरह भ्रमित करने वाली और गलत जानकारियां दी गई और कुछ मामलों में तो कोई जानकारी देने से इंकार तक अवैधानिक तौर पर कर दिया गया।
राज्यपाल सचिवालय से कार्रवाईशुरू हुई 
     जिला कलेक्टर नागौर ने उपखंड अधिकारी लाडनूं को एक पत्र सं. 2412 दिनांक 16.9.2008 भेजकर लिखा जैन विश्व भारती एवं जैन विश्व भारती मान्य विश्व विद्यालय द्वारा मनचाहे ढंग से की जा रही नियम विरूद्ध गतिविधियों पर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी। इस पत्र में बताया गया कि राज्यपाल सचिवालय से प्राप्त शिकायत के आधार पर एक टीम गठित कर वस्तुस्थिति की जांच बिन्दुवार कर स्वयं के निरीक्षण में तैयार करवाकर शिकायत के बिन्दुवार रिपोर्ट एक सप्ताह में भिजवायी जावे। यह आदेश कलेक्टर ने शासन उप सचिव जन अभाव अभियोग निराकरण विभाग के पत्र क्र. प. 2(25) आरपीजी/पब /बी /2008 दिनांक 15.9.2008 एवं दूरभाष के निर्देशों के आधार पर दिए।
13 खसरों की सवा सौ बीघा जमीन नगरपालिका की
    इसके जवाब में तत्कालीन उपखंड अधिकारी अजीत सिंह राजावत ने  अपने पत्र सं. सीएम/रीडर/08/42 दिनांक 03.10.2008 में बताया है कि जैन विश्व भारती के भीतर खसरा नं. 497 रकबा 19 बीघा 05 बिस्वा, ख.नं. 507 रकबा 5 बीघा 6 बिस्वा, ख.नं. 510 रकबा 6 बीघा 09 बिस्वा,  ख.नं. 511 रकबा 6 बीघा 14 बिस्वा,  ख.नं. 512 रकबा 3 बीघा 01 बिस्वा,  ख.नं. 513 रकबा 14 बिस्वा, ख.नं. 514 रकबा 13 बीघा 04 बिस्वा, ख.नं. 515 रकबा 5 बीघा 19 बिस्वा,  ख.नं. 516 रकबा 9 बीघा 9 बिस्वा,  ख.नं. 517 रकबा 19 बीघा 06 बिस्वा, ख.नं. 509 रकबा 8 बीघा 12 बिस्वा, ख.नं. 495/2247 रकबा 13 बीघा 13 बिस्वा- इन सभी कुल 12 खसराओं की करब सवा सौ बीघा भूमि राजस्व रेकर्ड के मुताबिक नगरपालिका लाडनूं के नाम से नामांकन सं. 2220 दिनांक 30.07.2001 द्वारा अंकित है। इसके अलावा खसरा नं. 504 रकबा 13 बीघा 10 बिस्वा की आधी भूमि नगरपालिका और आधी भूमि जैन विश्व भारती के नाम से  दर्ज है और जैन विश्व भारती मान्य विश्व विद्यालय के नाम से मात्र खसरा नं. 508 रकबा 13 बिस्वा भूमि ही दर्ज है।
अनेक अन्य खातेदारों की भूमि पर भी कब्जा
    इन संस्थाओं ने कुछ अन्य खातेदारों की भूमि खसरा नं. 496, 506, 507, व 508  पर भी अवैध कब्जा कर रखा है। अलग-अलग खसराओं पर निर्मित किए गए भवनों का वर्णन भी  इस रिपोर्ट में दिया गया है। इस भूमि के नगरपालिका लाडनूं में निहित होने, संस्थान द्वारा भूमि का रूपांतरण नहीं कराए जाने, निर्माण कार्यों के लिए स्थानीय निकाय से कोई स्वीकृति नहीं ली जाने की जानकारी देते हुए इसके लिए स्थानीय नगरपालिका को कार्यवाही के लिए उत्तरदायी ठहराया था।

नेहरू पार्क को अतिक्रमण से मुक्त करवाने की मांग


लाडनूं (कलम कला न्यूज)। स्थानीय  सामाजिक कार्यकर्ता महेशप्रकाश सांखला ने तहसीलदार सत्यनारायण शर्मा व अधिशाषी अधिकारी जस्साराम गोदारा को पत्र लिखकर जिला कलेक्टर के आदेशों की पालना करने तथा अपनी कार्यवाही पूर्ण कर शीघ्र रिपोर्ट भिजवाने बाबत मांग की है। सांखला ने अपने पत्र में लिखा है कि राजकीय भूमि व सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण कर अनधिकृत रूप से निर्मित धार्मिक पूजास्थलों के सम्बंध में राज्य सरकार द्वारा जारी नीति के अनुसार तुरन्त कार्यवाही की जावे। इस सम्बंध में बताया गया है कि राजस्थान उच्च न्यायालय की एसबी सिविल रिट पिटीशन सं. 2145/2010 एवं उच्चतम न्यायालय की विशेष अनुमति अपील (दीवानी) सं. 8519/2006 में अन्तरिम आदेश दिनांक 29-09-09 की पालना में उन्हें निर्देशित किया गया है, इसके बावजूद प्रकरण में कार्यवाही लम्बित रखी जा रही है। सांखला ने जिला कलेक्टर के पत्र क्रमांक- एफ.12()राजस्व/2010/3880-3888 दिनांक- 19-05-11, क्र. 11878-11897 दिनांक-01-12- 2010, क्र. 13754-13773 दिनांक- 30-12-2010, क्र. 2338-2357 दिनांक- 29-03-2011 एवं क्र. न्याय/2010/9616-46 दिनांक- 10-11-2010 व क्र. 09/6864 दिनांक-28-10-09 का अपने पत्र में हवाला दिया है, जिनकी स्थानीय अधिकारियों द्वारा कोई पालना नहीं की जा रही है।
     सांखला ने मांग की है कि नेहरू पार्क परिसर, लाडनूं को अतिक्रमण से मुक्त करावें। आवंटित भूमि खसरा नं. 497 सरहद लाडनूं को जिला कलेक्टर नागौर द्वारा पत्र क्रं. राजस्व राजस्व/86/903 दिनांक- 03-03-1986 द्वारा 30 वर्षों की लीज पर निशुल्क आवंटित किया गया था, परन्तु इसमें लीज शर्तों व नियमों का उल्लंघन किया गया है।  यहां निर्मित भवनों के लिए स्थानीय निकायों से निर्माण सम्बंधी आवश्यक स्वीकृति प्राप्त नहीं की गई और न कृषि भूमि के रूपान्तरण की कार्यवाही ही की गई। सांखला ने इस सम्बंध में उपखण्ड अधिकारी कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक- सीएम/रीडर/08/42 दिनांक- 03-10-2008, क्र. सीएम/रीडर/08/1623 दिनांक- 04-11-2008,  क्र. राज्यपाल सचिवालय/08/1781 व 1782 दिनांक- 16-10-2008 के सम्बंध में कार्यवाही नहीं की जाना बताते हुए तुरन्त कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने तहसीलदार कार्यालय से जारी पत्रांक-  भू.अ./2011/11/768 दिनांक- 07-04-2011 मेंसंलग्र की गई अतिक्रमियों की सूची के अनुसार अतिक्रमणों को हटाने व समस्त अनधिकृत रूप से बने मकानों को सरकारी तहबील में  लेने की मांग भी की है।
    इस सम्बंध में अनावश्यक विलम्ब करने, सभा-संस्थाओं के प्रभाव में आकर कत्र्तव्यनिष्ठा में विफल रहने, अपूर्ण सूचनाओं को अग्रेषित करने, रिकार्ड व पत्रावलियों को बिना देखे ही सूचनाएं भिजवाई जाने को गम्भीर व लापरवाही मानते हुए उच्चाधिकारियों व न्यायालय में वाद प्रस्तुत करने की चेतावनी भी दी है।

Monday, May 30, 2011

जनाक्रोश और पुलिस की भूमिका: जांच में महत्वपूर्ण होता है अपराधियों की वापसी का रास्ता


        दिनांक 11.3.91 को सुबह अखबार की हैडलाईन्स  देख ही रहा था कि थाना केसरीसिंहपुर, जिला श्रीगंगानगर के थानाधिकारी श्री हुकमसिंह ने दूरभाष पर कहा, सर! कस्बे में गत रात्रि को तीन बड़ी चोरियां हो गयाी हैं। इन वारदातों की जानकारी होने पर कस्बे में लगभग चार-पांच हजार की भीड़ इक_ी हो गई है। कृपया जल्दी पहुंचें। मैं तुरन्त वर्दी पहनकर कस्बा केसरीसिंहपुर पहुंचा। वहां पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। भीड़ भयंकर आक्रोशित थी और पुलिस के विरूद्ध नारे लगा रही थी। थाने का समस्त स्टाफ  सहमा-सहमा सा दिखाई दे रहा था। मुझे देखते ही भीड़ मेरी ओर लपकी और गुस्से का इजहार किया। मैंने भीड़ को समझाकर  घटनास्थल देखने के लिए कहा। चार-पांच हजार लोगों की भीड़ के साथ धक्का-पेल होते हुए मैं मौके पर पहुंचा। पुलिस के विरूद्ध नारेबाजी में ही भीड़ को समझाईश करते हुए घटनास्थल का निरीक्षण किया। भीड़ ने मुल्जिमों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। मैँने भी ड़ को समझाया कि यदि कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो पुलिस उसको संभालने में लग जाएगी और मुल्जिम बच जाएंगे। अत:तफतीश में थोड़ा समय तो लगेगा ही। भीड़ ने चौबीस घण्टों में  मुल्जिम गिरफ्तार नहीं किए जाने पर आन्दोलन की चेतावनी दी। मैं इस बात पर खुश था कि कम से कम थोड़ा समय तो मिला। बाद की रणनीति पुन: तैयार हो जाएगी और तब तब जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल आ जाएगा।
      भीड़ थोड़ी शांत हुई। इसके बाद सादा वर्दी में पुलिसकर्मियों को सूचना एकत्रित करने के लिए भेजा गया। पुलिस के परीचित लोगों केा किसी भी प्रकार के संदिग्धों के बारे में सूचना देने के लिए कहा गया। चार-पांच पुलिस दल गठित कर उनको हिदायत दी गई कि कस्बे से बाहर जाने वाले रास्तों के चार-पांच किलोमीटर तक रेकी (इलाके की छानबीन) की जावे। गठित पुलिस दल अपने काम में लग गए। दो-तीन घंटे की रेकी के बाद एक दल ने आकर बताया कि  कस्बे से दो-तीन किलोमीटर दूर रास्ते पर बिस्कुट के दो-तीन पैकेट पड़े मिले हैं। सूचनामहत्वपूर्ण थी। कस्बे में एक परचून की दुकान में भी नकबजनी की वारदात हुई थी। संभवत: ये बिस्कुट इसी दुकान से चोरी हुए थे। दुकान मालिक को बुलाकर पैकेट दिखाए गए तो उसने अपनी दुकान से चोरी होना बताया। इस पुख्ता जानकारी के बाद यह लगभग तय हो गया था कि चोर वारदात के बाद इसी रास्ते से लौटे हैं। थोड़ी देर बाद एक व्यक्ति ने आकर रिपोर्ट दज्र करवाई कि  उसके घर के सामने चौक में खड़ी ट्रेक्टर-ट्रोली को कोई चोर चोरी करके ले गए हैं। इस सूचना पर इस विचार को बल मिला कि चोर सम्भवत: ट्रेक्टर में आए थे और जाते समय ट्रॉली को उसमें जोड़कर उसमें चोरी का सामान भरकर अपने साथ ले गए। तीन दुकानों का सामान बगैर किसी साधन के ले जाया जाना सम्भव नहीं था।
     थाने में विचार मनन चल ही रहा था कि एक पुलिस दल ने आकर सूचना दी कि कस्बे में स्थित एक फैक्ट्री के चौकीदार ने बताया कि रात को करीब दो बजे जब वह फैक्ट्री के गेट पर था तो वहां से एक ट्रेक्टर गुजरा था। उस ट्रेक्टर में आठ-दस आदमी बैठे थे एवं ट्रोली में सामान भरा हुआ था। ट्रेक्टर की आवाज काफी भारी थी। सम्भवत: वह आयशर रहा होगा। सूचना काफी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उसी रास्तें में आगे जाकर बिस्कुट के दो-तीन पैकेट मिले थे, जिनकी शिनाख्त हो चुकी थी। अत: यह स्पष्टत: हो गया कि चोर टे्रक्टर लाए थे और घर के सामने खड़ी ट्रोली को ट्रेक्टर के साथ जोड़कर चोरी का सामान भरकर उसी रास्ते से गए थे। जिन तीन दुकानों में चोरी हुई थी, उनमें से एक दुकान से कपड़े का सामान, दूसरी दुकान से परचून का सामान, तीसरी दुकान से रेडियो, टीवी, इत्यादि चोरी हुए थे। इसके साथ इस बात को बल मिला कि चोर शाम ढले बाजार में आ गए होंगे और ट्रेक्टर कहीं पर ख्ड़ा करके बाजार में रेकी की होगी।
     कस्बें छोड़े गए पुलिसकर्मियों को एवं सम्पर्क सूत्रों को इस सूचना को और आगे विकसित करने के निर्देश दिए गए। करीब चार-पांच बजे एक सम्पर्क सूत्र ने आकर बताया कि जब वह करीब सात बजे अपनी दुकान बंद करके घर जा रहा था, उस समय उसने एक ढाबे के सामने ट्रेक्टर खड़ा देखा था। उस पर आठ दस आदमी बैठे थे। वे आपस में बातें कर रहे थे। देखने में ग्रामीण परिवेश के लग रहे थे। पुलिस दल को भेजकर आस पास की दुकानों व ढाबों से पूछताछ करवाई गई। एक ढाबा मालिक ने बताया कि उसके ढाबे में रात्रि करीब नौ बजे दस लोगों ने खाना खाया था। रोटियां सथी अपने साथ लाए थे। रोटियां ऐ पुराने कपड़े में बंधी हुई थी। उन्होंने ढाबे से मीट की दस प्लेटें लेकर खाना खाया था। इस सूचना पर यह स्पष्ट हो गया कि वे व्यक्ति ठेठ गांव के थे। क्योंकि अक्सर गांव के लोग जब शहर में आते हैं तो खाना उइसी तरह कपड़े में बांधकर लाते हैं एवं कहीं पेड़ की छांव में या अन्य स्थान पर बैठकर खाना खा लेते हैं। सब्जी नहीं होती है तो किसी ढाबे से ले लेते हैँ, नहीं तो बिना सब्जी के ही खा लेते हैं। जाने के रास्ते(Way of Return)की ओर बीस-पच्चीस किलोमीटर क्षेत्र के गांवों की मौजेवार (Village Crime Note Books)  निकालकर बदमाशों के रिकॉर्ड की छानबीन शुरू की गई। हालांकि कार्रवाई हवा में तीर चलाने जैसी थी लेकिन जनता के चौबीस घण्टे के अल्टीमेटम के बाद जनाक्रोश को देखते हुए भरपूर प्रयास किया जाना आवश्यक था।
     अब तक की तफतीश व संदिग्धों के बारे में सम्पर्क सूत्रों को बताया गया और तफतीश को आगे बढाया गया।    
 ...लगभग सात बजे एक सम्पर्क सूत्र ने आकर बताया कि ट्रेक्टर पर सवार संदिग्ध लोगों ने जिस ढाबे पर खाना खाया था उसके पास खड़े एक टैम्पो चालक को उनमें से एक व्यक्ति ने गांव संगतपुरा में चलने के लिए कहा था। रात्रि के समय में जिले में उग्रवादी घटना के मद्दे नजर टैम्पो चालक ने वहां जाने से मना कर दिया था। सूचना काफी महत्वपूर्ण थी। गांव संगतपुरा की मौजेवार को निकालकर  बदमाशों की सूची बनाई गई। थोड़ी देर बाद एक सम्पर्क सूत्र ने आकर बताया कि जिस व्यक्ति ने टैम्पो चालक से बात की थी उस संदिग्ध व्यक्ति को उसने भी देखा था। वह व्यक्ति तीन-चार महीने पहले एक समाज विशेष की किसी औरत को लेकर बैठी समाज की पंचायत में एक पक्ष की ओर से बोल रहा था। उसकी रिश्तेदारी गांव संगतपुरा में थी एवं वह गांव 3 टी में सुरजीत सिंह के घर ब्याही हुई थी।
       3  टी की मौजेवार देखने से पता चला कि सुरजीत सिंह का कई नकबजनियों में चालान हुआ था। एक पुलिस टीम ग्राम संगतपुरा में भेजी गई जिसने सुरजीत सिंह के ससुर से सुरजीत सिंह के बारे में पूछताछ की तो उसने कई दिनों से उस गांव में उसका आना नहीं बताया। ग्राम 3 टी में सुरजीत के घर पर उसके ससुर को साथ लेकर पुलिस दल ने रात्रि करीब बारह बजे छापा मारा। बड़ी ऊंची आवाज में डैक बज रहा था। बार-बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस दल ने चारों ओर से घेरा डालकर पुलिस कमाण्डो को दीवार पर चढाकर अन्दर से मुख्य दरवाजा खोलने के लिए कहा। दरवाजा खुलते ही पांच-सात लोगों के जागने पर पूछा गया तो पुलिस पार्टी को देखकर वे हड़बड़ाकर भागने लगे। उनको रोक कर भागने का कारण पूछा तो सभी के मुंह से निकला गलती हो गई। घर की तलाशी लेने पर दुकानों से चोरी गया पूरा सामान मिल गया एवं आठ व्यक्तियों को पुलिस हिरासत में ले लिया गया। सारे घर की तलाशी ली गई तो उस दिन पिछली रात हुई चोरी के अतिरिक्त  इलाके में हुई आठ-दस अन्य चोरियों का सामान भी उनके घर में मिल गया, जिसे धारा 102 द.प्र.सं. के तहत जब्त किया गया। ट्रेक्टर व ट्रोली के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने करीब एक घंटा पहले घमूड़वाली क्षेत्र में गांव 36 एलएनपी में मोहन सिंह के घर जाना बताया। मोहनसिंह व सुरजीत सिंह आपस में रिश्तेदार हैं।  वायरलैस पर घमूड़वाली थानाधिकारी श्री राजेन्द्र सिंह को सूचना दी गई कि 36 एलएनपी में मोहनसिं के घर जाकर ट्रेक्टर आने का इंतजार करे। करीब एक घंटे बाद ट्रेक्टर वहां पहुंचा तो मोहनसिंह व एक अन्य नकबजन को ट्रेक्टर ट्रोली सहित गिरफ्तार कर लिया गया।
       इस प्रकार कड़ी से कड़ी जोड़कर एक बहुत बड़ी वारदात मात्र अठारह-बीस घंटे में खोलने में  पुलिस को कामयाबी मिली। इस कामयाबी में वापसी का रास्ता (Way of retreat) सिद्धांत काम आया।                

जनाक्रोश और पुलिस की भूमिका: जांच में महत्वपूर्ण होता है अपराधियों की वापसी का रास्ता


        दिनांक 11.3.91 को सुबह अखबार की हैडलाईन्स  देख ही रहा था कि थाना केसरीसिंहपुर, जिला श्रीगंगानगर के थानाधिकारी श्री हुकमसिंह ने दूरभाष पर कहा, सर! कस्बे में गत रात्रि को तीन बड़ी चोरियां हो गयाी हैं। इन वारदातों की जानकारी होने पर कस्बे में लगभग चार-पांच हजार की भीड़ इक_ी हो गई है। कृपया जल्दी पहुंचें। मैं तुरन्त वर्दी पहनकर कस्बा केसरीसिंहपुर पहुंचा। वहां पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। भीड़ भयंकर आक्रोशित थी और पुलिस के विरूद्ध नारे लगा रही थी। थाने का समस्त स्टाफ  सहमा-सहमा सा दिखाई दे रहा था। मुझे देखते ही भीड़ मेरी ओर लपकी और गुस्से का इजहार किया। मैंने भीड़ को समझाकर  घटनास्थल देखने के लिए कहा। चार-पांच हजार लोगों की भीड़ के साथ धक्का-पेल होते हुए मैं मौके पर पहुंचा। पुलिस के विरूद्ध नारेबाजी में ही भीड़ को समझाईश करते हुए घटनास्थल का निरीक्षण किया। भीड़ ने मुल्जिमों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। मैँने भी ड़ को समझाया कि यदि कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो पुलिस उसको संभालने में लग जाएगी और मुल्जिम बच जाएंगे। अत:तफतीश में थोड़ा समय तो लगेगा ही। भीड़ ने चौबीस घण्टों में  मुल्जिम गिरफ्तार नहीं किए जाने पर आन्दोलन की चेतावनी दी। मैं इस बात पर खुश था कि कम से कम थोड़ा समय तो मिला। बाद की रणनीति पुन: तैयार हो जाएगी और तब तब जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल आ जाएगा।
      भीड़ थोड़ी शांत हुई। इसके बाद सादा वर्दी में पुलिसकर्मियों को सूचना एकत्रित करने के लिए भेजा गया। पुलिस के परीचित लोगों केा किसी भी प्रकार के संदिग्धों के बारे में सूचना देने के लिए कहा गया। चार-पांच पुलिस दल गठित कर उनको हिदायत दी गई कि कस्बे से बाहर जाने वाले रास्तों के चार-पांच किलोमीटर तक रेकी (इलाके की छानबीन) की जावे। गठित पुलिस दल अपने काम में लग गए। दो-तीन घंटे की रेकी के बाद एक दल ने आकर बताया कि  कस्बे से दो-तीन किलोमीटर दूर रास्ते पर बिस्कुट के दो-तीन पैकेट पड़े मिले हैं। सूचनामहत्वपूर्ण थी। कस्बे में एक परचून की दुकान में भी नकबजनी की वारदात हुई थी। संभवत: ये बिस्कुट इसी दुकान से चोरी हुए थे। दुकान मालिक को बुलाकर पैकेट दिखाए गए तो उसने अपनी दुकान से चोरी होना बताया। इस पुख्ता जानकारी के बाद यह लगभग तय हो गया था कि चोर वारदात के बाद इसी रास्ते से लौटे हैं। थोड़ी देर बाद एक व्यक्ति ने आकर रिपोर्ट दज्र करवाई कि  उसके घर के सामने चौक में खड़ी ट्रेक्टर-ट्रोली को कोई चोर चोरी करके ले गए हैं। इस सूचना पर इस विचार को बल मिला कि चोर सम्भवत: ट्रेक्टर में आए थे और जाते समय ट्रॉली को उसमें जोड़कर उसमें चोरी का सामान भरकर अपने साथ ले गए। तीन दुकानों का सामान बगैर किसी साधन के ले जाया जाना सम्भव नहीं था।
     थाने में विचार मनन चल ही रहा था कि एक पुलिस दल ने आकर सूचना दी कि कस्बे में स्थित एक फैक्ट्री के चौकीदार ने बताया कि रात को करीब दो बजे जब वह फैक्ट्री के गेट पर था तो वहां से एक ट्रेक्टर गुजरा था। उस ट्रेक्टर में आठ-दस आदमी बैठे थे एवं ट्रोली में सामान भरा हुआ था। ट्रेक्टर की आवाज काफी भारी थी। सम्भवत: वह आयशर रहा होगा। सूचना काफी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उसी रास्तें में आगे जाकर बिस्कुट के दो-तीन पैकेट मिले थे, जिनकी शिनाख्त हो चुकी थी। अत: यह स्पष्टत: हो गया कि चोर टे्रक्टर लाए थे और घर के सामने खड़ी ट्रोली को ट्रेक्टर के साथ जोड़कर चोरी का सामान भरकर उसी रास्ते से गए थे। जिन तीन दुकानों में चोरी हुई थी, उनमें से एक दुकान से कपड़े का सामान, दूसरी दुकान से परचून का सामान, तीसरी दुकान से रेडियो, टीवी, इत्यादि चोरी हुए थे। इसके साथ इस बात को बल मिला कि चोर शाम ढले बाजार में आ गए होंगे और ट्रेक्टर कहीं पर ख्ड़ा करके बाजार में रेकी की होगी।
     कस्बें छोड़े गए पुलिसकर्मियों को एवं सम्पर्क सूत्रों को इस सूचना को और आगे विकसित करने के निर्देश दिए गए। करीब चार-पांच बजे एक सम्पर्क सूत्र ने आकर बताया कि जब वह करीब सात बजे अपनी दुकान बंद करके घर जा रहा था, उस समय उसने एक ढाबे के सामने ट्रेक्टर खड़ा देखा था। उस पर आठ दस आदमी बैठे थे। वे आपस में बातें कर रहे थे। देखने में ग्रामीण परिवेश के लग रहे थे। पुलिस दल को भेजकर आस पास की दुकानों व ढाबों से पूछताछ करवाई गई। एक ढाबा मालिक ने बताया कि उसके ढाबे में रात्रि करीब नौ बजे दस लोगों ने खाना खाया था। रोटियां सथी अपने साथ लाए थे। रोटियां ऐ पुराने कपड़े में बंधी हुई थी। उन्होंने ढाबे से मीट की दस प्लेटें लेकर खाना खाया था। इस सूचना पर यह स्पष्ट हो गया कि वे व्यक्ति ठेठ गांव के थे। क्योंकि अक्सर गांव के लोग जब शहर में आते हैं तो खाना उइसी तरह कपड़े में बांधकर लाते हैं एवं कहीं पेड़ की छांव में या अन्य स्थान पर बैठकर खाना खा लेते हैं। सब्जी नहीं होती है तो किसी ढाबे से ले लेते हैँ, नहीं तो बिना सब्जी के ही खा लेते हैं। जाने के रास्ते(Way of Return)की ओर बीस-पच्चीस किलोमीटर क्षेत्र के गांवों की मौजेवार (Village Crime Note Books)  निकालकर बदमाशों के रिकॉर्ड की छानबीन शुरू की गई। हालांकि कार्रवाई हवा में तीर चलाने जैसी थी लेकिन जनता के चौबीस घण्टे के अल्टीमेटम के बाद जनाक्रोश को देखते हुए भरपूर प्रयास किया जाना आवश्यक था।
     अब तक की तफतीश व संदिग्धों के बारे में सम्पर्क सूत्रों को बताया गया और तफतीश को आगे बढाया गया।    
 ...लगभग सात बजे एक सम्पर्क सूत्र ने आकर बताया कि ट्रेक्टर पर सवार संदिग्ध लोगों ने जिस ढाबे पर खाना खाया था उसके पास खड़े एक टैम्पो चालक को उनमें से एक व्यक्ति ने गांव संगतपुरा में चलने के लिए कहा था। रात्रि के समय में जिले में उग्रवादी घटना के मद्दे नजर टैम्पो चालक ने वहां जाने से मना कर दिया था। सूचना काफी महत्वपूर्ण थी। गांव संगतपुरा की मौजेवार को निकालकर  बदमाशों की सूची बनाई गई। थोड़ी देर बाद एक सम्पर्क सूत्र ने आकर बताया कि जिस व्यक्ति ने टैम्पो चालक से बात की थी उस संदिग्ध व्यक्ति को उसने भी देखा था। वह व्यक्ति तीन-चार महीने पहले एक समाज विशेष की किसी औरत को लेकर बैठी समाज की पंचायत में एक पक्ष की ओर से बोल रहा था। उसकी रिश्तेदारी गांव संगतपुरा में थी एवं वह गांव 3 टी में सुरजीत सिंह के घर ब्याही हुई थी।
       3  टी की मौजेवार देखने से पता चला कि सुरजीत सिंह का कई नकबजनियों में चालान हुआ था। एक पुलिस टीम ग्राम संगतपुरा में भेजी गई जिसने सुरजीत सिंह के ससुर से सुरजीत सिंह के बारे में पूछताछ की तो उसने कई दिनों से उस गांव में उसका आना नहीं बताया। ग्राम 3 टी में सुरजीत के घर पर उसके ससुर को साथ लेकर पुलिस दल ने रात्रि करीब बारह बजे छापा मारा। बड़ी ऊंची आवाज में डैक बज रहा था। बार-बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस दल ने चारों ओर से घेरा डालकर पुलिस कमाण्डो को दीवार पर चढाकर अन्दर से मुख्य दरवाजा खोलने के लिए कहा। दरवाजा खुलते ही पांच-सात लोगों के जागने पर पूछा गया तो पुलिस पार्टी को देखकर वे हड़बड़ाकर भागने लगे। उनको रोक कर भागने का कारण पूछा तो सभी के मुंह से निकला गलती हो गई। घर की तलाशी लेने पर दुकानों से चोरी गया पूरा सामान मिल गया एवं आठ व्यक्तियों को पुलिस हिरासत में ले लिया गया। सारे घर की तलाशी ली गई तो उस दिन पिछली रात हुई चोरी के अतिरिक्त  इलाके में हुई आठ-दस अन्य चोरियों का सामान भी उनके घर में मिल गया, जिसे धारा 102 द.प्र.सं. के तहत जब्त किया गया। ट्रेक्टर व ट्रोली के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने करीब एक घंटा पहले घमूड़वाली क्षेत्र में गांव 36 एलएनपी में मोहन सिंह के घर जाना बताया। मोहनसिंह व सुरजीत सिंह आपस में रिश्तेदार हैं।  वायरलैस पर घमूड़वाली थानाधिकारी श्री राजेन्द्र सिंह को सूचना दी गई कि 36 एलएनपी में मोहनसिं के घर जाकर ट्रेक्टर आने का इंतजार करे। करीब एक घंटे बाद ट्रेक्टर वहां पहुंचा तो मोहनसिंह व एक अन्य नकबजन को ट्रेक्टर ट्रोली सहित गिरफ्तार कर लिया गया।
       इस प्रकार कड़ी से कड़ी जोड़कर एक बहुत बड़ी वारदात मात्र अठारह-बीस घंटे में खोलने में  पुलिस को कामयाबी मिली। इस कामयाबी में वापसी का रास्ता (Way of retreat) सिद्धांत काम आया।                

जनाक्रोश और पुलिस की भूमिका: जांच में महत्वपूर्ण होता है अपराधियों की वापसी का रास्ता


        दिनांक 11.3.91 को सुबह अखबार की हैडलाईन्स  देख ही रहा था कि थाना केसरीसिंहपुर, जिला श्रीगंगानगर के थानाधिकारी श्री हुकमसिंह ने दूरभाष पर कहा, सर! कस्बे में गत रात्रि को तीन बड़ी चोरियां हो गयाी हैं। इन वारदातों की जानकारी होने पर कस्बे में लगभग चार-पांच हजार की भीड़ इक_ी हो गई है। कृपया जल्दी पहुंचें। मैं तुरन्त वर्दी पहनकर कस्बा केसरीसिंहपुर पहुंचा। वहां पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। भीड़ भयंकर आक्रोशित थी और पुलिस के विरूद्ध नारे लगा रही थी। थाने का समस्त स्टाफ  सहमा-सहमा सा दिखाई दे रहा था। मुझे देखते ही भीड़ मेरी ओर लपकी और गुस्से का इजहार किया। मैंने भीड़ को समझाकर  घटनास्थल देखने के लिए कहा। चार-पांच हजार लोगों की भीड़ के साथ धक्का-पेल होते हुए मैं मौके पर पहुंचा। पुलिस के विरूद्ध नारेबाजी में ही भीड़ को समझाईश करते हुए घटनास्थल का निरीक्षण किया। भीड़ ने मुल्जिमों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। मैँने भी ड़ को समझाया कि यदि कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो पुलिस उसको संभालने में लग जाएगी और मुल्जिम बच जाएंगे। अत:तफतीश में थोड़ा समय तो लगेगा ही। भीड़ ने चौबीस घण्टों में  मुल्जिम गिरफ्तार नहीं किए जाने पर आन्दोलन की चेतावनी दी। मैं इस बात पर खुश था कि कम से कम थोड़ा समय तो मिला। बाद की रणनीति पुन: तैयार हो जाएगी और तब तब जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल आ जाएगा।
      भीड़ थोड़ी शांत हुई। इसके बाद सादा वर्दी में पुलिसकर्मियों को सूचना एकत्रित करने के लिए भेजा गया। पुलिस के परीचित लोगों केा किसी भी प्रकार के संदिग्धों के बारे में सूचना देने के लिए कहा गया। चार-पांच पुलिस दल गठित कर उनको हिदायत दी गई कि कस्बे से बाहर जाने वाले रास्तों के चार-पांच किलोमीटर तक रेकी (इलाके की छानबीन) की जावे। गठित पुलिस दल अपने काम में लग गए। दो-तीन घंटे की रेकी के बाद एक दल ने आकर बताया कि  कस्बे से दो-तीन किलोमीटर दूर रास्ते पर बिस्कुट के दो-तीन पैकेट पड़े मिले हैं। सूचनामहत्वपूर्ण थी। कस्बे में एक परचून की दुकान में भी नकबजनी की वारदात हुई थी। संभवत: ये बिस्कुट इसी दुकान से चोरी हुए थे। दुकान मालिक को बुलाकर पैकेट दिखाए गए तो उसने अपनी दुकान से चोरी होना बताया। इस पुख्ता जानकारी के बाद यह लगभग तय हो गया था कि चोर वारदात के बाद इसी रास्ते से लौटे हैं। थोड़ी देर बाद एक व्यक्ति ने आकर रिपोर्ट दज्र करवाई कि  उसके घर के सामने चौक में खड़ी ट्रेक्टर-ट्रोली को कोई चोर चोरी करके ले गए हैं। इस सूचना पर इस विचार को बल मिला कि चोर सम्भवत: ट्रेक्टर में आए थे और जाते समय ट्रॉली को उसमें जोड़कर उसमें चोरी का सामान भरकर अपने साथ ले गए। तीन दुकानों का सामान बगैर किसी साधन के ले जाया जाना सम्भव नहीं था।
     थाने में विचार मनन चल ही रहा था कि एक पुलिस दल ने आकर सूचना दी कि कस्बे में स्थित एक फैक्ट्री के चौकीदार ने बताया कि रात को करीब दो बजे जब वह फैक्ट्री के गेट पर था तो वहां से एक ट्रेक्टर गुजरा था। उस ट्रेक्टर में आठ-दस आदमी बैठे थे एवं ट्रोली में सामान भरा हुआ था। ट्रेक्टर की आवाज काफी भारी थी। सम्भवत: वह आयशर रहा होगा। सूचना काफी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उसी रास्तें में आगे जाकर बिस्कुट के दो-तीन पैकेट मिले थे, जिनकी शिनाख्त हो चुकी थी। अत: यह स्पष्टत: हो गया कि चोर टे्रक्टर लाए थे और घर के सामने खड़ी ट्रोली को ट्रेक्टर के साथ जोड़कर चोरी का सामान भरकर उसी रास्ते से गए थे। जिन तीन दुकानों में चोरी हुई थी, उनमें से एक दुकान से कपड़े का सामान, दूसरी दुकान से परचून का सामान, तीसरी दुकान से रेडियो, टीवी, इत्यादि चोरी हुए थे। इसके साथ इस बात को बल मिला कि चोर शाम ढले बाजार में आ गए होंगे और ट्रेक्टर कहीं पर ख्ड़ा करके बाजार में रेकी की होगी।
     कस्बें छोड़े गए पुलिसकर्मियों को एवं सम्पर्क सूत्रों को इस सूचना को और आगे विकसित करने के निर्देश दिए गए। करीब चार-पांच बजे एक सम्पर्क सूत्र ने आकर बताया कि जब वह करीब सात बजे अपनी दुकान बंद करके घर जा रहा था, उस समय उसने एक ढाबे के सामने ट्रेक्टर खड़ा देखा था। उस पर आठ दस आदमी बैठे थे। वे आपस में बातें कर रहे थे। देखने में ग्रामीण परिवेश के लग रहे थे। पुलिस दल को भेजकर आस पास की दुकानों व ढाबों से पूछताछ करवाई गई। एक ढाबा मालिक ने बताया कि उसके ढाबे में रात्रि करीब नौ बजे दस लोगों ने खाना खाया था। रोटियां सथी अपने साथ लाए थे। रोटियां ऐ पुराने कपड़े में बंधी हुई थी। उन्होंने ढाबे से मीट की दस प्लेटें लेकर खाना खाया था। इस सूचना पर यह स्पष्ट हो गया कि वे व्यक्ति ठेठ गांव के थे। क्योंकि अक्सर गांव के लोग जब शहर में आते हैं तो खाना उइसी तरह कपड़े में बांधकर लाते हैं एवं कहीं पेड़ की छांव में या अन्य स्थान पर बैठकर खाना खा लेते हैं। सब्जी नहीं होती है तो किसी ढाबे से ले लेते हैँ, नहीं तो बिना सब्जी के ही खा लेते हैं। जाने के रास्ते(Way of Return)की ओर बीस-पच्चीस किलोमीटर क्षेत्र के गांवों की मौजेवार (Village Crime Note Books)  निकालकर बदमाशों के रिकॉर्ड की छानबीन शुरू की गई। हालांकि कार्रवाई हवा में तीर चलाने जैसी थी लेकिन जनता के चौबीस घण्टे के अल्टीमेटम के बाद जनाक्रोश को देखते हुए भरपूर प्रयास किया जाना आवश्यक था।
     अब तक की तफतीश व संदिग्धों के बारे में सम्पर्क सूत्रों को बताया गया और तफतीश को आगे बढाया गया।      
 ...लगभग सात बजे एक सम्पर्क सूत्र ने आकर बताया कि ट्रेक्टर पर सवार संदिग्ध लोगों ने जिस ढाबे पर खाना खाया था उसके पास खड़े एक टैम्पो चालक को उनमें से एक व्यक्ति ने गांव संगतपुरा में चलने के लिए कहा था। रात्रि के समय में जिले में उग्रवादी घटना के मद्दे नजर टैम्पो चालक ने वहां जाने से मना कर दिया था। सूचना काफी महत्वपूर्ण थी। गांव संगतपुरा की मौजेवार को निकालकर  बदमाशों की सूची बनाई गई। थोड़ी देर बाद एक सम्पर्क सूत्र ने आकर बताया कि जिस व्यक्ति ने टैम्पो चालक से बात की थी उस संदिग्ध व्यक्ति को उसने भी देखा था। वह व्यक्ति तीन-चार महीने पहले एक समाज विशेष की किसी औरत को लेकर बैठी समाज की पंचायत में एक पक्ष की ओर से बोल रहा था। उसकी रिश्तेदारी गांव संगतपुरा में थी एवं वह गांव 3 टी में सुरजीत सिंह के घर ब्याही हुई थी।
       3  टी की मौजेवार देखने से पता चला कि सुरजीत सिंह का कई नकबजनियों में चालान हुआ था। एक पुलिस टीम ग्राम संगतपुरा में भेजी गई जिसने सुरजीत सिंह के ससुर से सुरजीत सिंह के बारे में पूछताछ की तो उसने कई दिनों से उस गांव में उसका आना नहीं बताया। ग्राम 3 टी में सुरजीत के घर पर उसके ससुर को साथ लेकर पुलिस दल ने रात्रि करीब बारह बजे छापा मारा। बड़ी ऊंची आवाज में डैक बज रहा था। बार-बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस दल ने चारों ओर से घेरा डालकर पुलिस कमाण्डो को दीवार पर चढाकर अन्दर से मुख्य दरवाजा खोलने के लिए कहा। दरवाजा खुलते ही पांच-सात लोगों के जागने पर पूछा गया तो पुलिस पार्टी को देखकर वे हड़बड़ाकर भागने लगे। उनको रोक कर भागने का कारण पूछा तो सभी के मुंह से निकला गलती हो गई। घर की तलाशी लेने पर दुकानों से चोरी गया पूरा सामान मिल गया एवं आठ व्यक्तियों को पुलिस हिरासत में ले लिया गया। सारे घर की तलाशी ली गई तो उस दिन पिछली रात हुई चोरी के अतिरिक्त  इलाके में हुई आठ-दस अन्य चोरियों का सामान भी उनके घर में मिल गया, जिसे धारा 102 द.प्र.सं. के तहत जब्त किया गया। ट्रेक्टर व ट्रोली के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने करीब एक घंटा पहले घमूड़वाली क्षेत्र में गांव 36 एलएनपी में मोहन सिंह के घर जाना बताया। मोहनसिंह व सुरजीत सिंह आपस में रिश्तेदार हैं।  वायरलैस पर घमूड़वाली थानाधिकारी श्री राजेन्द्र सिंह को सूचना दी गई कि 36 एलएनपी में मोहनसिं के घर जाकर ट्रेक्टर आने का इंतजार करे। करीब एक घंटे बाद ट्रेक्टर वहां पहुंचा तो मोहनसिंह व एक अन्य नकबजन को ट्रेक्टर ट्रोली सहित गिरफ्तार कर लिया गया।
       इस प्रकार कड़ी से कड़ी जोड़कर एक बहुत बड़ी वारदात मात्र अठारह-बीस घंटे में खोलने में  पुलिस को कामयाबी मिली। इस कामयाबी में वापसी का रास्ता (Way of retreat) सिद्धांत काम आया।                

Sunday, May 15, 2011